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गरियाबंद : राजिम कुंभ में कोसा की चमक, कोसा रेशम से सशक्त हो रहा ग्रामीण भारत

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गरियाबंद : राजिम कुंभ में कोसा की चमक, कोसा रेशम से सशक्त हो रहा ग्रामीण भारत

कोसा उत्पादन किसानों को दिखा नया रास्ता, होंगे खुशहाल
गरियाबंद, 05 फरवरी 2026
राजिम कुंभ कल्प के नवीन मेला मैदान में गरियाबंद जिले के विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसमें विभाग के योजनाओं और उनके लाभ बताए जा रहे हैं। ग्रामोद्योग विभाग के रेशम प्रभाग द्वारा कोसा उत्पादन की जानकारी श्रद्धालुओं और मेलार्थियों को दी जा रही है। रेशम प्रभाग के कर्मचारी रामगोपाल चौहान एवं धनसाय कटरे द्वारा कोसा निर्माण एवं उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है, जिसे देखने और समझने बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। कर्मचारियों द्वारा बताया गया कि कोसा का उत्पादन वर्ष में तीन बार किया जाता है। कोसा कीटों का पालन मुख्य रूप से कहवा और साजा के पेड़ों पर किया जाता है। पहली फसल तैयार होने में 35 से 40 दिन, दूसरी फसल में 40 से 50 दिन तथा तीसरी फसल में 60 से 70 दिन का समय लगता है। तीसरी फसल में अधिक समय लगने का कारण ठंडा मौसम होता है।
सरकार द्वारा कोसा को समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है। यदि कोसा ए ग्रेड का होता है तो उसका मूल्य प्रति नग 5 रुपये, बी ग्रेड का 4 रुपये 15 पैसे तथा सी ग्रेड का 3 रुपये निर्धारित है। गरियाबंद जिले के किरवई, कौंदकेरा, लोहरसी, रावड़ और मालगांव क्षेत्रों में लगभग 25 एकड़ भूमि में कोसा उत्पादन का कार्य किया जा रहा है। कोसा उत्पादन के लिए स्वस्थ डिम्ब का मूल्य 18 रुपये प्रति नग है, जिसमें से सरकार द्वारा 16 रुपये की अनुदान राशि दी जाती है, जबकि किसान की वास्तविक लागत मात्र 2 रुपये होती है। कोसा रेशम से निर्मित साड़ियों की बाजार में कीमत वर्तमान में 3 हजार से 4 हजार रुपये तक है। कोसा उत्पादन करने वाले किसानों को लागत सहित सालाना लगभग 5 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो सकती है। मेले में आए श्रद्धालु और मेलार्थी इस जानकारी को उत्सुकता से सुनते हुए कोसा उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को समझते और इससे जुड़ी संभावनाओं के बारे में जानकारी लेते नजर आ रहे हैं।

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